Notes : India courts staff less vs sharia & Khaap

India courts staff less

How to make Indian courts more efficient








जब अपनी न्यायपालिका इतनी लचर है कि ३ करोड़ से अधिक केस लटके पड़े हैं... तो शरीया कोर्ट और खाप को ना हम पैर जमाने से रोक सकते हैं और ना ही उन्हें पूर्णतया अनुचित ही कह सकते हैं. यदि समाज अपने स्तर पर ऐसी व्यवस्था बना रहा है, जिसमें लोगों के छोटे-मोटे झगड़ों का निपटारा किया जा सकता है... विशेषकर तब, जब न्यायलय अपाहिज हैं और बड़े केसेस को ही निपटा नहीं पा रहे... तो ये पूर्णतया गलत कैसे हुआ? जहाँ तक मुझे स्मरण है, पारसियों में भी ऐसी ही कोई व्यवस्था है जिसमें समाज के बुजुर्ग बैठ कर निर्णय देते हैं.
यदि ये विचार उचित है तो ऐसे में तो हिन्दुओं को भी ऐसी कुछ पहल करनी पड़ेगी.

असल मे छोटे मोटे केस ही आगे बढ़ा रूप लेते हैं । पंचायत वगैरह जैसे सिस्टम इन्हें उस रूप में जाने से रोक लेते हैं । बस अपने तानाशाही रवैये की वजह से कभी कभी आलोचना हो जाती है और इसी वजह से ये सिस्टम अपना अस्तित्व खो रहे हैं ।



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